
一 | 今日,罗永浩发布新一期对话节目,此次对话嘉宾为名创优品创始人叶国富,他表达了对“叫板马云”“胖改店”以及西贝事件的看法。 在对话中,叶国富回应早年前叫板马云一事,他认为,要放弃线上线下的概念,回归产品本质。如果有好产品,线上线下都会卖得很好。 डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देशभक्ति जगाने का काम जो संघ में कर रहे हैं, वह सारे समाज में हो। ऐसा बहुत लोग बिना किसी लाभ के कर रहे हैं। धर्म को जीने वाले गांव-गांव, शहरों की झुग्गी-झोपडि़यों में भी मिलेंगे। यह सारा जो भारत का बल है, बिखरा है। उसे एक रचना में बांधना है। कोई व्यक्ति, कुटुंब अछूता न रहे. ऐसा कार्य विस्तार करना पड़ेगा।,एक-एक गांव, एक-एक गली, एक-एक घर तक। समाज के सब वर्गों में, सब स्तरों तक। ऐसे संगठन का जाल उत्पन्न करना पहला काम है। यह सज्ज्न शक्ति जो बिखरी पड़ी है, उनको संपर्कित करना। उन्हें संघ में नहीं लाना, सिर्फ नेटवर्किंग बनाना है।,हम प्रयास करेंगे कि समाज के ऐसे सभी गर्वों को चलाने वाले, आपेनियियम मेकर में परस्पर नित्य संबंध बना रहे। वह अपने संबंधित वर्ग की उन्नति के लिए काम करें। लेकिन साथ ही यह अहसास हो कि हम इस समाज के अंग हैं। यह समाज रहेगा तो हमारा अस्तित्व रहेगा। सब लोग मिलकर काम करेंगे तो समस्या का निरसन और अभाव की पूर्ति कैसे हो, तय कर सकेंगे।,कोई दुर्बल वर्ग है तो उसकी मदद करें। यह समाज के स्वभाव में आ जाए, सहज स्वाभाविक प्रक्रिया बन जाए, इसका प्रयास हम लोग करेंगे। भारत के अधिकांश पड़ोसी देश पहले कभी भारत ही थे। लोग वही हैं, भूगोल, नदियां, जंगल वही है। बस नक्शे पर रेखाएं खींची गई हैं।,पहला कर्तव्य है कि ये जो अपने ही हैं, वह अपनत्व की भावना से जुड़ जाएं। देश अलग-अलग रहेंगे, लेकिन विरासत में मिले मूल्यों के आधार पर इन सभी की प्रगति हो। सबसे बड़ा भारत है, इसलिए उसको काम करना होगा। इससे जो संबंध बनेंगे, वह विश्व के लिए उपकारक होंगे। उस दृष्टि से क्या करना होगा, इस पर स्वयंसेवक विचार कर रहे हैं।,हमारा विचार है कि संगठित विचारशक्ति के आधार के समाज का परिवर्तन हो। बदलाव लाने वाले कुछ काम हमने शुरू किए हैं। अब हम स्वयंसेवकों के घरों के आधार पर अड़ोस-पड़ोस के समाज को उसमें सहभागी करना चाहते हैं। उन पांच कामों को हम पंच परिवर्तन कहते हैं। सामाजिक पापों, संस्कारहीनता, संबंधों की अज्ञानता के कारण जो होता है, उसको ठीक करने के लिए कुटुम्ब प्रबोधन। विशेषकर नई पीढ़ी का माइंडसेट इंडीविज्यूल बनता जा रहा है।,पहला, परिवार के सभी सदस्यों को सप्ताह में एक बार साथ बैठना चाहिए। भजन करें, भोजन करें, आपस में गपशप करें। बच्चे इस चर्चा में प्रश्न पूछेंगे, इसलिए अपनी तैयारी रखें। तीसरी बात है कि मैं और मेरा परिवार जिस समाज व राष्ट्र के कारण हैं, उसके लिए क्या कर सकते हैं, इस पर विचार करें। जब ऐसे काम बच्चे करने लेंगे तो संबंधों का महत्व समझ आएगा। दूसरा है पर्यावरण। नीतिगत बातें बदलने में बहुत समय लगेगा।,लेकिन अपने जीवन में बदलाव के लिए छोटे काम कर सकते हैं। जैसे कि पानी बचाओ, ¨सगल यूज प्लास्टिक हटाओ और पेड़ लगाओ। तीसरा सामाजिक समरसता है। यह करने में कठिन है, लेकिन करनी ही होगी। विषमता मनुष्य के मन में है। इसको मन से जाना चाहिए। इसके लिए कुछ व्यवहार करना पड़ेगा। जिस इलाके में हम रहते हैँ, आते-जाते हैँ, वहां अपने व्यक्तगत मित्र होने चाहिए। कुटुम्ब में मित्रता होनी चाहिए।,आज शुरू करो, तीन-चार साल में सब बन जाएगा। सबको करना पड़ेगा। जिस तरह मंदिर, पानी, श्मशान में कोई भेद नहीं होता। चौथा आत्मनिर्भरता है। इसे अपने घर से शुरू करें। जब स्वदेशी की बात करते हैं तो लगता है कि विदेशों से संबंध नहीं रहेंगे। ऐसा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार तो होगा, लेकिन इसमें दबाव नहीं, स्वेच्छा होना चाहिए। इसलिए स्वदेशी का पालन करना है। अपने घर की चौखट के अंदर अपनी भाषा और अपनी वेशभूषा चाहिए।,भाषा, भूषा, भजन, भोजन अपने घर के अंदर अपना, अपनी परंपरा का चाहिए। जहां आवश्यक है, अपनी भाषा के शब्द प्रयोग करो।पांचवां है हर हालत में संविधान, नियम, कानून का पालन करके चलना। कोई भड़काऊ बात हो गई तो भी कानून हाथ में नहीं लेना। थोड़ा सा आंदोलन करना पड़े तो करो। उपद्रवकारी लोग इसका लाभ लेते हैं, हमको तोड़ते हैं। अपना बिल समय पर भरें, लाइसेंस आदि समय पर नवीनीकृत कराएं। दैनिक जीवन में यही देशभक्ति है।,आज देश के लिए चौबीस घंटे जीने की आवश्यकता है। इसी तरह छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना होगा। यह सोचें कि मुझसे, मेरे घर से शुरू होगा तो देश में जाएगा, तब दुनिया को भारत में दिखेगा। इन सभी पर विचार चल रहा है। निर्णय प्रतिनिधि सभा में होना है, लेकिन इनमें से पंच परिर्वतन तो होना ही होना है। दुनिया अपनेपन से चलती है, सौदे से नहीं चल सकती। यह करना है तो इक्के-दुक्के का काम नहीं, एक पूरा राष्ट्र इसमें लगना चाहिए।,सृष्टि में विविधता है, परस्पर विरोध भी है। लेकिन यह विविधता एकता का ही आविष्कार है, लेकिन सबको, मानना और संभाल कर चलना, सब सुखी हों। हमारी विचारधारा में यही है। अपने देश में परंपरागत रूप से ही इतने वर्ग हैं। बाहर से भी वर्ग आए हैं, विशेष कर धार्मिक वर्ग है। बाहर से आक्रमण के नाते विचारधाराएं आईं, लेकिन किसी कारण उनको जिन्होंने स्वीकार किया, वह तो यहीं के हैं और आज यहीं हैं। भले ही विचारधारा विदेशी रहे, लेकिन हिंदू विचार तो वसुधैध कुटुम्बकम है। हर विचार को अच्छा मानता है।,जो दूरियां बनी हैं, उन्हें पाटने के लिए दोनों तरफ से कुछ करने की आवश्यकता है। वह होने के लिए संवाद बने, परस्पर अविश्वास को पाटकर निशंक होकर सब एक राष्ट्र के अंग के नाते अपनी विविधता के बावजूद आगे बढ़ें। उसके लिए भी हम संभल-संभल कर कदम बढ़ाने की बात कर रहे हैं। ऐसा विचार कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रतिमान बन रहे हैं, लेकिन उसके आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा चिंतन बनाना है। मनुष्य को धर्म के लिए त्याग करना होता है और धर्म की रक्षा करने से सबकी रक्षा होती है।,विविधता को समाप्त किए बिना चलती है। विश्व इसे भूल गया है। 300-350 वर्षों के पहले से जो धीरे-धीरे जड़वाद और व्यक्तिवाद अति पर पहुंच गया। इससे बने जीवन में भद्रता, संस्कार नहीं रहा। आज विश्व के देशों में यही स्थिति है। दुनिया में अशांति और कलह है, कट्टरपन बढ़ गया है। जीवन में किसी प्रकार की भद्रता, किसी प्रकार का संस्कार न हो, ऐसी इच्छा रखने वाले लोग वो इस कट्टरता का प्रचार करते हैं। यह बहुत संकट है सभी देशों पर, अगली पीढ़ी पर।,अधूरी दृष्टि से चल रही दुनिया को 180 डिग्री से अपने आउटलुक को बदलना होगा। वह आउटलुक है धर्म। धर्म रिलीजन नहीं है, पूजा-पाठ, खानपान से परे है। रिलीजन आन द टाप आफ रिलीजन है धर्म। उसमें विविधता का स्वीकार्य है। धर्म संतुलन सिखाता है। वह किसी अतिवाद पर नहीं जाने देता। अपने जीवन को धार्मिक जीवन बनाकर सारी दुनिया को देने की आवयकता है। आज की दुनिया संबंधों को तरस रही है। धर्म विश्व की इन समस्याओं का समाधान देता है।,शांति, पर्यावरण, उदारता को धर्म ²ष्टि को जानना पड़ेगा। धर्म यूनिवर्सल है, जैसे कि गुरुत्वाकर्षण। इसलिए यह विश्व धर्म है। इसे दुनिया को देने के लिए हिंदू समाज संगठित होना होगा। इसका मतलब धर्मांतरण नहीं है, धर्म में कन्वर्जन नहीं होता। भारतवर्ष की लाइफ मिशन ऐसा माडल खड़ा करना है, जिसका अनुकरण विश्व कर सके। व्यक्ति जीवन से लेकर पर्यावरण तक कैसा रास्ता हो, यह दिखाने के लिए भारत के समाज को अपना उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। यह विचार संघ में पहले से था, लेकिन कोई सुनता नहीं। आज भारत की और संघ की स्थिति है कि पूरा समाज सुनता है।आज सभी बारी-बारी से आकर संघ को देखिए, संघ को समझिए।。他举例,名创优品的进店转化率是30%,而电商都没有这么高。 谈及罗永浩与西贝的风波,叶国富表示,“这一次我很顶你”。他表示,现做现炒才是人间烟火,才是消费者想要的,而不是预制菜,或者是几个月、一年前做好的加热一下,这些大家都不需要。

二 | 另外,他还谈及了永辉超市与胖东来的合作。他表示,于东来是大爱,无私地帮助永辉调改和成长,不是商业合作,不收一分钱,纯帮忙。

三 | “全球都没有这样的商业人物,完全是一个另类。我每次见到他,都虔诚地向他学习。

四 | ” 他总结道,如今最佩服的中国当代企业家只有三个人:任正非、宁高宁和于东来。 谈叫板马云 从0到100亿,我的速度更快 叶国富表示,自己比较喜欢逛街,创业就是逛街逛出来的。他称,当时在日本逛街,看到杂货店和百货店设计得精美,价格也很有竞争力,当时中国没有这种模式,就把这个模式引入中国,从而诞生了名创优品。 在电商蓬勃发展那些年,叶国富多次公开喊话马云,称“电商取代实体零售是痴人说梦”。2016年,他甚至包下报纸头版喊话马云:“早点认输,1个亿我帮你给!”事件的源头是2012年时,王健林和马云打赌,十年后电商能不能占到中国零售市场的50%,输给对方1亿。

五 | 如今再谈及这个话题,叶国富表示,自己对线下更有感情,现在名创优品线上销售占比10%左右,90%在线下,现在大部分零售品牌也依然以线下为主。 他谈及,电商确实发展很快,对零售业冲击很大,但要找到适合自己的发展模式。

六 | 名创优品通过线下也做得很成功,也不否定线上,现在也在大力发展线上。他提到,很多线上品牌也在做线下,比如小米。

七 | 雷军创业之初推出互联网手机,只在线上销售,后来发现线下流量更强大,现在小米线下店也有上万家。他认为,要放弃线上线下的概念,回归产品本质。商业本质还是要把产品做好,一个企业如果没有好产品,什么都不是。

八 | 如果有好产品,线上线下都会卖得很好。

九 | 他回忆,名创优品从0做到100亿,只用了五年时间,比马云从0到100亿速度还要快。最高峰一年开一千多家店,另外进店转化率是30%,进来100个人有30个人买单,“电商有这么高的转化率吗?”他反问道。

十 | 谈加盟:只有差的东西才要打广告 苏丹红是一种化学染色剂,具有基因毒性和潜在致癌性。早在2003年,欧盟就明确禁止苏丹红用于食品和化妆品领域。 名创优品起步仅仅3个月后就开放了加盟。在叶国富看来,店铺是最好的广告,每天店门口都过几万人,看到我们门店生意这么好,很多人主动找我们加盟。 他透露,名创优品第一家店开在广州,第一个加盟商是云南人,他在广州逛街时发现这个模式很好,主动找到名创优品将店开到云南丽江,一开业生意比广州的店还要好;海外加盟商是菲律宾人来广州旅游,看到门店生意这么好,主动找名创优品将模式引入菲律宾。

十一 | 他提到,名创优品的加盟商有38%的毛利。上海南京路开了名创优品IP乐园(MINISO LAND)全球壹号店,九个月做了一个亿,最高峰一个月做了1600万。“真正好的东西不需要广告,只有差的东西要广告。从创业到现在我们没有在加盟广告上花过一分钱。 谈IP:不浪费一个亿就算失败 名创优品于2013年创立,叶国富表示,2016年就开始考虑与IP联名,目前已经和全球150多个IP开展了合作。他还透露,名创优品正在做重大转型,以前大家认为名创优品是一家零售公司,今年要把名创优品变成一家文化创意公司。

十二 | 在他看来,人均GDP到了一定程度,物质需求已经很丰富了,就要满足精神需求。精神需求就要靠手办、靠IP、靠兴趣消费,来买自己喜欢的东西,取悦自己。 “中国未来要成为强国,要靠科技和文化,科技出海,文化出海,不再是靠一条内裤、一个袜子、一个衬衣赚多少钱,能不能科技出海成为强国,能不能一手硬科技,一手软文化,能不能有一大批中国的IP走向世界。” 他表示,未来十年名创优品要带一百个中国IP走向世界,今年已经签约了十七个独家IP。他对团队说,今年在收购IP方面,不浪费一个亿就算失败。

十三 | “只有浪费了才能有更好的东西出来,收购一百个能有10%的成功率,能有10个成功,我已经很厉害了。 谈罗永浩与西贝风波 这一次我很顶你 谈及罗永浩与西贝的纠纷,叶国富表示,“这一次我很顶你”。 他表示,这一次罗永浩倒逼线下餐饮做得更好,更有吸引力,为线下零售引流做了巨大的贡献,而不是伤害。现做现炒才是人间烟火,才是消费者想要的,而不是预制菜,中央厨房或者是几个月、一年前做好的,给我加热一下,这些大家都不需要。 “我现在出去吃饭有阴影了,走了三个餐馆,问他是不是预制菜,一看菜单就有点不像现炒的,我就换一家,最后又换一家。到第三家,我就点了两个菜,一个炒鸡,一个炒青菜,一个白米饭,这三个不应该是预制菜了。

十四 | ” 他强调,如果线下的餐饮重新变革,踏踏实实把现炒做好,流量会更大会更好。 谈与胖东来合作:于东来不收一分钱 谈到与胖东来的合作,他表示,于东来是大爱,无私地帮助永辉调改和成长,不是商业合作,不收一分钱,纯帮忙。

十五 | 胖东来成功背后,他认为是产品品质做得好,把每个产品都做好、服务做好,对员工好,胖东来在许昌就火了,进而成为全国有名的超市。 他提到,永辉超市的“胖改店”进展很好,全国都在做“胖改店”,不只我们,步步高也在做,很多超市品牌都在做,都在学习走品质零售这条路线。他认为,过去的低质低价这条路线做不下去了,老百姓也不需要了,每个人都想买点有品质的东西,特别是吃的,更要讲究品质和安全。

十六 | 他还回应了外界对于他收购永辉超市一事的不解。“看不懂就对了,看懂了就没有意义了。”叶国富强调说。他回忆,2015年自己在美国看到Costco很兴奋,感觉中国没有好的超市;而看到胖东来帮着永辉调改第一家店,第一天业绩就增长了十三倍。看到胖东来调改永辉之后,自己看到了中国超市的未来。 他直言,中国这么大的人口,没有一个好的超市。除了胖东来和山姆,大量超市不行,都在倒闭亏损。胖东来只在许昌和新乡开,很多人买山姆是被逼得没办法,因为没有好的供给,没什么选择就逼得去买山姆。胖东来调改永辉之后,自己看到这个模式可行,就下定决心收购了永辉。 谈及最佩服的中国当代企业家,叶国富给出了三个:任正非、宁高宁、于东来。他对于于东来也是不吝赞美。“有大爱精神,开心、利他、美好。全球都没有这样的商业人物,完全是一个另类。每次见到他,都虔诚地向他学习。”叶国富说。

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Published on:20:02:56